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Ashtavakra Story in Hindi | महर्षि अष्टावक्र की अद्भुत जीवन गाथा, राजा जनक और अष्टावक्र गीता

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  महर्षि अष्टावक्र : शरीर से वक्र, ज्ञान से विश्ववंद्य ऋषि प्रस्तावना भारतीय सनातन परंपरा में अनेक ऋषि, मुनि और दार्शनिक हुए हैं, जिन्होंने मानव जीवन के गहनतम रहस्यों को समझकर संसार को ज्ञान का प्रकाश दिया। इनमें महर्षि अष्टावक्र का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। उनका जीवन केवल एक ऋषि की कथा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, ज्ञान, सत्य और आत्मबोध की ऐसी गाथा है जो आज भी मनुष्य को बाहरी रूप-रंग से ऊपर उठकर अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देती है। महर्षि अष्टावक्र का शरीर जन्म से ही आठ स्थानों से वक्र था, किंतु उनका ज्ञान इतना प्रखर था कि बड़े-बड़े विद्वान भी उनके सामने नतमस्तक हो जाते थे। वे आगे चलकर मिथिला नरेश राजा जनक के गुरु बने और उनके तथा जनक के बीच हुए संवाद "अष्टावक्र गीता" के रूप में अमर हो गए। लेकिन इस महान ऋषि का जीवन केवल दर्शन और आत्मज्ञान तक सीमित नहीं था। उनके जीवन में संघर्ष था, उपहास था, पिता को मुक्त कराने का संकल्प था, अहंकार को तोड़ने वाले प्रसंग थे और सत्य की विजय की अद्भुत कथा भी थी। गर्भ में ही प्रकट हुआ असाधारण ज्ञान महर्षि अष्टावक्र के पिता ऋषि कहोड़ और म...