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The Mystery of Yakshinis | यक्षिणियों का रहस्यमयी संसार और 36 यक्षिणियाँ

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  यक्षिणियाँ: प्राचीन भारत की रहस्यमयी दिव्य शक्तियाँ उत्पत्ति, पौराणिक कथाएँ और दिव्य संसार का रहस्य भारत की प्राचीन संस्कृति केवल देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की कथाओं तक सीमित नहीं है। हमारे ग्रंथों में अनेक ऐसी दिव्य शक्तियों का भी वर्णन मिलता है, जिनका संसार मनुष्य और देवताओं के बीच एक विशेष स्थान रखता है। इन्हीं रहस्यमयी शक्तियों में एक नाम है — यक्ष और यक्षिणियाँ। आज भी जब हम किसी प्राचीन मंदिर की मूर्तियों, पुरानी कथाओं या लोक मान्यताओं को देखते हैं, तो कहीं न कहीं यक्षिणियों का उल्लेख मिलता है। कभी वे प्रकृति की रक्षक के रूप में दिखाई देती हैं, तो कभी धन-संपदा की संरक्षिका के रूप में। लेकिन आखिर ये यक्षिणियाँ कौन थीं? क्या वे केवल कल्पना मात्र थीं या भारतीय परंपरा में उनका कोई विशेष स्थान था? आइए जानते हैं भारतीय ग्रंथों में वर्णित यक्षिणियों के इस रहस्यमयी संसार को। यक्षिणी कौन थीं? भारतीय ग्रंथों में यक्षिणियों को एक विशेष दिव्य वर्ग की स्त्री शक्तियों के रूप में बताया गया है। जिस प्रकार देव, दानव, गंधर्व, किन्नर और नाग आदि अलग-अलग दिव्य जातियाँ मानी गई हैं, उसी प्रकार यक...

Duryodhan Biography in Hindi | दुर्योधन का सम्पूर्ण जीवन, महाभारत युद्ध और अंत

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  दुर्योधन का जन्म: क्या वह जन्म से ही खलनायक था? प्रस्तावना महाभारत का नाम आते ही जिन पात्रों की सबसे पहले चर्चा होती है, उनमें दुर्योधन का नाम प्रमुख है। अधिकांश लोग उसे केवल महाभारत का खलनायक मानते हैं, जिसने अपने अहंकार, ईर्ष्या और अधर्म के कारण पूरे कुरुवंश को विनाश की ओर धकेल दिया। लेकिन क्या दुर्योधन वास्तव में जन्म से ही ऐसा था? उसके जन्म के समय कौन-सी रहस्यमयी घटनाएँ घटी थीं? उसके जन्म से पहले हस्तिनापुर में क्या परिस्थितियाँ थीं? आखिर क्यों उसके जन्म को अशुभ माना गया? और धृतराष्ट्र के परिवार में युयुत्सु तथा दुश्शाला का जन्म कैसे हुआ? दुर्योधन की जन्मकथा केवल एक राजकुमार के जन्म की कहानी नहीं है, बल्कि यह भाग्य, अधर्म, मातृत्व, मोह और आने वाले महाविनाश की पहली आहट भी है। महाभारत का महानायक या खलनायक? दुर्योधन कौरवों का ज्येष्ठ भ्राता तथा हस्तिनापुर के महाराज धृतराष्ट्र और महारानी गांधारी का सबसे बड़ा पुत्र था। वह अत्यंत पराक्रमी, वीर और गदायुद्ध का अद्वितीय योद्धा था, किंतु बचपन से ही उसके स्वभाव में अहंकार, ईर्ष्या और हस्तिनापुर के सिंहासन को किसी भी कीमत पर प्राप्त करने...