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The Mystery of Yakshinis | यक्षिणियों का रहस्यमयी संसार और 36 यक्षिणियाँ

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  यक्षिणियाँ: प्राचीन भारत की रहस्यमयी दिव्य शक्तियाँ उत्पत्ति, पौराणिक कथाएँ और दिव्य संसार का रहस्य भारत की प्राचीन संस्कृति केवल देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की कथाओं तक सीमित नहीं है। हमारे ग्रंथों में अनेक ऐसी दिव्य शक्तियों का भी वर्णन मिलता है, जिनका संसार मनुष्य और देवताओं के बीच एक विशेष स्थान रखता है। इन्हीं रहस्यमयी शक्तियों में एक नाम है — यक्ष और यक्षिणियाँ। आज भी जब हम किसी प्राचीन मंदिर की मूर्तियों, पुरानी कथाओं या लोक मान्यताओं को देखते हैं, तो कहीं न कहीं यक्षिणियों का उल्लेख मिलता है। कभी वे प्रकृति की रक्षक के रूप में दिखाई देती हैं, तो कभी धन-संपदा की संरक्षिका के रूप में। लेकिन आखिर ये यक्षिणियाँ कौन थीं? क्या वे केवल कल्पना मात्र थीं या भारतीय परंपरा में उनका कोई विशेष स्थान था? आइए जानते हैं भारतीय ग्रंथों में वर्णित यक्षिणियों के इस रहस्यमयी संसार को। यक्षिणी कौन थीं? भारतीय ग्रंथों में यक्षिणियों को एक विशेष दिव्य वर्ग की स्त्री शक्तियों के रूप में बताया गया है। जिस प्रकार देव, दानव, गंधर्व, किन्नर और नाग आदि अलग-अलग दिव्य जातियाँ मानी गई हैं, उसी प्रकार यक...

Sarnath Heritage: 2500 वर्षों का इतिहास, बौद्ध स्थापत्य और भारत का राष्ट्रीय प्रतीक

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  सारनाथ का इतिहास: जहाँ से पूरी दुनिया में गूंजा बुद्ध का पहला संदेश प्रस्तावना   जब भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद पहली बार अपने मुख से धर्म का संदेश दिया, तब वह पावन भूमि सारनाथ थी। यहीं से करुणा, अहिंसा और मध्यम मार्ग का प्रकाश पूरी दुनिया में फैलना शुरू हुआ। इसलिए सारनाथ केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि मानवता को शांति और सत्य का मार्ग दिखाने वाली पवित्र भूमि है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित सारनाथ बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थों में से एक है। यहाँ भगवान बुद्ध ने अपने पाँच शिष्यों को पहला उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन किया और बौद्ध संघ की स्थापना की। सम्राट अशोक द्वारा निर्मित अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष आज भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है, जबकि हाल ही में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिलने से सारनाथ की वैश्विक पहचान और भी सुदृढ़ हुई है। आइए, इस पावन भूमि के इतिहास, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़े अद्भुत तथ्यों को विस्तार से जानते हैं। सारनाथ का नाम और प्राचीन पहचान सारनाथ केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि करुणा, त्याग और ज्ञान की वह पावन भूमि...

Ananda Mahasthavira Biography in Hindi | भगवान बुद्ध के परमप्रिय शिष्य और धर्मरक्षक आनंद की अमर गाथा

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बुद्ध का सम्यक मार्ग और आनंद महास्थविर भगवान बुद्ध के सबसे प्रिय शिष्य, सेवक और सखा की प्रेरणादायक गाथा Gautama Buddha का जीवन केवल एक महापुरुष की कथा नहीं, बल्कि मानवता को दुःख से मुक्ति दिलाने वाले ज्ञान की यात्रा है। जब बुद्ध को बोधगया में सम्बोधि प्राप्त हुई, तब उन्होंने संसार को एक ऐसा मार्ग दिया जिसे उन्होंने मध्यम मार्ग कहा। यह मार्ग न तो अत्यधिक भोग का था और न ही कठोर तपस्या का, बल्कि संतुलित और जागरूक जीवन जीने का मार्ग था। यह केवल संन्यासियों के लिए ही नहीं, बल्कि गृहस्थ लोगों के लिए भी दुःखों से मुक्ति पाने का साधन बना। बुद्ध ने सबसे पहले सारनाथ में अपने पाँच पूर्व साथियों को यह ज्ञान दिया और वहीं से बुद्ध धम्म का आरम्भ हुआ। बुद्ध स्वयं इसे कोई नया धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ शैली मानते थे। बुद्ध धम्म का विस्तार और प्रमुख उपासक धीरे-धीरे बुद्ध के उपदेश दूर-दूर तक फैलने लगे। उनके उपासकों में उनके पिता राजा शुद्धोधन, माता समान महाप्रजापति गौतमी, पत्नी यशोधरा, पुत्र राहुल, मगध नरेश बिम्बिसार, अजातशत्रु, राजा प्रसेनजित और आगे चलकर सम्राट अशोक जैसे महान शासक भी सम्मिलित...