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Jantar Mantar Complete History in Hindi: रहस्य, वैज्ञानिक यंत्र और भारत की 5 वेधशालाएँ

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  जंतर मंतर का इतिहास, रहस्य और 5 अनोखी वेधशालाएँ भूमिका क्या आपने कभी सोचा है कि लगभग तीन सौ वर्ष पहले, जब न घड़ियाँ थीं, न दूरबीनें, न कंप्यूटर और न ही आधुनिक वैज्ञानिक मशीनें, तब लोग समय कैसे जानते होंगे? वे सूर्य और चंद्र ग्रहण का अनुमान कैसे लगाते होंगे, ऋतु परिवर्तन को कैसे समझते होंगे और ग्रहों-नक्षत्रों की स्थिति का पता कैसे लगाते होंगे? इन सभी प्रश्नों का उत्तर भारत की एक अद्भुत वैज्ञानिक धरोहर जंतर मंतर में छिपा है। 'जंतर मंतर' नाम सुनते ही कई लोगों को यह कोई रहस्यमय या जादुई स्थान लगता है। कुछ लोग इसे मंदिर, महल या किला समझते हैं, तो कुछ के मन में दिल्ली के जंतर मंतर के कारण धरना-प्रदर्शन का स्थान होने की छवि बन जाती है। लेकिन वास्तव में जंतर मंतर इनमें से कुछ भी नहीं है। यह पत्थर, ईंट, चूने और संगमरमर से बनी विशाल खगोलीय वेधशालाओं का समूह है। यहाँ की प्रत्येक संरचना गणित और ज्यामिति के सिद्धांतों पर आधारित एक वैज्ञानिक यंत्र है, जिसकी सहायता से समय की गणना, सूर्य, चंद्रमा, ग्रहों और नक्षत्रों की गति का अध्ययन, ऋतु परिवर्तन का अवलोकन तथा पंचांग के लिए आवश्यक खगोलीय ग...

Vishalgad Fort & Battle of Pavan Khind | विशालगढ़ किला और पावनखिंड की अमर गाथा

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  विशालगढ़ किला : मराठा शौर्य, बलिदान और स्वराज्य की अमर गाथा प्रस्तावना महाराष्ट्र की सह्याद्रि पर्वतमाला में स्थित विशालगढ़ किला केवल पत्थरों से बना एक दुर्ग नहीं, बल्कि मराठा साम्राज्य के साहस, त्याग और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। यह वही ऐतिहासिक किला है, जिसने संकट की घड़ी में छत्रपति शिवाजी महाराज को आश्रय दिया और जहां से स्वराज्य की रक्षा की अमर कहानी लिखी गई। विशालगढ़ का नाम आते ही वीर बाजीप्रभु देशपांडे, पावनखिंड का युद्ध और मराठा सैनिकों का अतुलनीय बलिदान स्मरण हो उठता है। विशालगढ़ किला कहाँ स्थित है? विशालगढ़ किला महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले की शाहूवाड़ी तहसील में, सह्याद्रि पर्वतमाला की ऊँची पहाड़ियों के बीच स्थित है। ऊँचाई पर बने इस दुर्ग के चारों ओर गहरी घाटियाँ, घने जंगल और दुर्गम पर्वतीय रास्ते हैं, जिसने इसे प्राचीन समय से ही एक मजबूत और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण किला बनाया। आज विशालगढ़ के आसपास सह्याद्रि की हरियाली, ऊँचे पर्वत और मनमोहक प्राकृतिक दृश्य दिखाई देते हैं। लेकिन कभी इन्हीं पहाड़ियों के बीच सैनिकों की आवाजें, घोड़ों की टापें और युद्ध के रणघोष गूंजते थे...