संदेश

सनातन धर्म लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

84 Pillars Temple Gokul | चौरासी खम्बा मंदिर गोकुल: श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की भूमि

चित्र
  चौरासी खम्बा मंदिर: जहाँ आज भी गूँजती हैं नन्हे कान्हा की किलकारियाँ प्रस्तावना ब्रजभूमि का प्रत्येक कण भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं से जुड़ा हुआ है। मथुरा, वृंदावन, गोकुल और महावन जैसे पवित्र स्थलों पर आज भी भक्त कृष्ण की उपस्थिति का अनुभव करते हैं। इन्हीं पावन स्थलों में से एक है चौरासी खम्बा मंदिर, जिसे नंद भवन के नाम से भी जाना जाता है। यह केवल एक प्राचीन मंदिर नहीं, बल्कि वह स्थान माना जाता है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल्यकाल की अनेक मनमोहक लीलाएँ की थीं। सदियों से यह मंदिर श्रद्धा, भक्ति और ब्रज संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। --- चौरासी खम्बा मंदिर कहाँ स्थित है? चौरासी खम्बा मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के महावन (गोकुल) में स्थित है। यह स्थान मथुरा शहर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद वासुदेव जी उन्हें कंस के भय से यमुना पार कर गोकुल लाए थे और नंद बाबा तथा यशोदा माता के संरक्षण में सौंपा था। माना जाता है कि यही स्थान नंद बाबा का निवास था, जिसे आज नंद भवन अथवा चौरासी खम्बा मंदिर के रूप में जा...

The Destruction of Yaduvansh After Mahabharata | साम्ब का श्राप और यदुवंश का विनाश

चित्र
साम्ब का परिहास और यदुवंश का विनाश कैसे श्रीकृष्ण के ही पुत्र बने पूरे यादव कुल के नाश का कारण? प्रस्तावना  महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। धर्म की विजय हुई, लेकिन इस विजय की कीमत बहुत भारी थी। लाखों योद्धाओं के प्राण गए, अनेक माताओं की गोद सूनी हो गई और हस्तिनापुर शोक में डूब गया। इसी युद्ध के बाद एक ऐसा श्राप दिया गया जिसने आगे चलकर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के कुल — यदुवंश — का अंत कर दिया। और आश्चर्य की बात यह है कि इस विनाश का कारण बने स्वयं श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब। यह कथा केवल श्राप की नहीं, बल्कि अहंकार, समय और नियति की भी है। गांधारी का श्रीकृष्ण को श्राप महाभारत का भीषण युद्ध समाप्त हो चुका था। माता गांधारी अपने सौ पुत्रों के वियोग में गहरे शोक से व्याकुल थीं। हस्तिनापुर का राजमहल मातम और पीड़ा से भर गया था। इसी समय भगवान श्रीकृष्ण उन्हें सांत्वना देने पहुँचे। किंतु पुत्र-वियोग से टूट चुकी गांधारी ने इस महाविनाश के लिए श्रीकृष्ण को भी उत्तरदायी माना। शोक और क्रोध से भरे स्वर में उन्होंने कहा— "जिस प्रकार मेरे कुल का सर्वनाश हुआ है, उसी प्रकार एक दिन तुम्हारे यदुवंश का भी...