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असरानी बायोग्राफी: 'शोले' के जेलर से लेकर 350 फिल्मों तक का सफर | Asrani Biography in Hindi

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  असरानी: ‘शोले’ के जेलर से कहीं आगे की कहानी | संघर्ष, प्रेम, दोस्ती और अभिनय के कई रंग प्रस्तावना हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जिन्हें किसी एक किरदार से इतनी बड़ी पहचान मिलती है कि दर्शक उन्हें उसी किरदार के नाम से याद करने लगते हैं। लेकिन उस एक भूमिका के पीछे छिपी उनकी पूरी जिंदगी और अभिनय यात्रा उससे कहीं ज्यादा बड़ी होती है। गोवर्धन ठाकुरदास असरानी, जिन्हें सिनेमा प्रेमी प्यार से असरानी के नाम से जानते हैं, ऐसे ही कलाकार थे। “हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं!” ‘शोले’ में बोला गया यह संवाद असरानी को भारतीय सिनेमा की यादों में हमेशा के लिए दर्ज कर गया। खाकी वर्दी, मूंछें, तनी हुई चाल, चेहरे पर अकड़ और संवाद बोलने का अनोखा अंदाज—आज भी इस किरदार को याद करते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। लेकिन सवाल है—क्या असरानी सिर्फ ‘शोले’ के जेलर थे? बिल्कुल नहीं। जयपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर मुंबई पहुंचे इस युवक का सपना केवल कॉमेडियन बनने का नहीं था। वे अभिनेता बनना चाहते थे। कभी नायक बनने का सपना देखते थे और अपने अभिनय को लगातार नए रूप में आजमाना चाहते थे। रंगमंच ...

​Manoj Kumar Biography: विभाजन का दर्द, 'भारत कुमार' बनने का सफर और उनकी फिल्मों के अनसुने रहस्य

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भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई बड़े अभिनेता आए, लेकिन कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो सिर्फ अपनी फिल्मों से नहीं, बल्कि अपने विचारों, भावनाओं और देशप्रेम के कारण हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहते हैं। ऐसे ही महान अभिनेता थे Manoj Kumar, जिन्हें पूरा देश प्यार से “भारत कुमार” कहता है। उन्होंने फिल्मों में केवल अभिनय नहीं किया, बल्कि देशभक्ति को लोगों के दिलों तक पहुंचाया। उनकी फिल्मों में भारत की मिट्टी की खुशबू, किसानों का संघर्ष, सैनिकों का बलिदान और भारतीय संस्कार साफ दिखाई देते थे। यह कहानी है एक ऐसे बच्चे की, जिसने बचपन में विभाजन का दर्द देखा, रिफ्यूजी कैंप में जीवन बिताया और फिर भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा देशभक्त अभिनेता बन गया। जन्म, वास्तविक नाम और विभाजन का दर्द Manoj Kumar का जन्म 24 जुलाई 1937 को एबटाबाद में हुआ था, जो आज Pakistan में स्थित है। उनका असली नाम हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी था। जब साल 1947 में भारत का विभाजन हुआ, तब वे केवल 10 साल के थे। विभाजन की आग में उनका परिवार सब कुछ छोड़कर भारत आ गया। घर, जमीन, रिश्तेदार और बचपन — सब पीछे छूट गया। दिल्ली आने के बाद उनका परिवार रिफ...