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वेदों की वो महान विदुषियाँ, जिन्हें इतिहास भूल गया | Vedic Women Scholars of Ancient India

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  जब प्राचीन भारत की स्त्रियों ने ज्ञान, दर्शन और शास्त्रार्थ में अपनी आवाज दर्ज की प्रस्तावना — जब ज्ञान पर किसी एक का अधिकार नहीं था कल्पना कीजिए एक प्राचीन सभा की। चारों ओर विद्वान बैठे हैं। कहीं यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित है, कहीं मंत्रों का उच्चारण हो रहा है और कहीं जीवन, आत्मा तथा ब्रह्मांड के रहस्यों पर गंभीर चर्चा चल रही है। अचानक सभा में एक स्त्री उठती है। वह किसी से अनुमति लेकर केवल अपनी बात कहने नहीं आई। उसके मन में प्रश्न है। वह पूछती है। फिर दूसरा प्रश्न करती है। और उसका प्रश्न धीरे-धीरे मनुष्य के जीवन से निकलकर पूरे ब्रह्मांड के अंतिम आधार तक पहुँच जाता है। यह स्त्री है—गार्गी वाचक्नवी। लेकिन गार्गी अकेली नहीं थीं। एक दूसरी स्त्री धन-संपत्ति के सामने खड़ी होकर पूछती है—यदि धन मुझे अमरत्व नहीं दे सकता, तो मैं उसका क्या करूँ? वह हैं—मैत्रेयी। कहीं लोपामुद्रा अपने पति अगस्त्य से जीवन और गृहस्थ धर्म के बारे में संवाद करती हैं। कहीं घोषा अपनी पीड़ा और एकांत के बीच अश्विनीकुमारों से स्वास्थ्य और सम्मानपूर्ण जीवन की प्रार्थना करती हैं। अपाला अपनी शारीरिक पीड़ा को मंत्र में ढालत...