Sarnath Heritage: 2500 वर्षों का इतिहास, बौद्ध स्थापत्य और भारत का राष्ट्रीय प्रतीक
सारनाथ का इतिहास: जहाँ से पूरी दुनिया में गूंजा बुद्ध का पहला संदेश प्रस्तावना जब भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद पहली बार अपने मुख से धर्म का संदेश दिया, तब वह पावन भूमि सारनाथ थी। यहीं से करुणा, अहिंसा और मध्यम मार्ग का प्रकाश पूरी दुनिया में फैलना शुरू हुआ। इसलिए सारनाथ केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि मानवता को शांति और सत्य का मार्ग दिखाने वाली पवित्र भूमि है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित सारनाथ बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थों में से एक है। यहाँ भगवान बुद्ध ने अपने पाँच शिष्यों को पहला उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन किया और बौद्ध संघ की स्थापना की। सम्राट अशोक द्वारा निर्मित अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष आज भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है, जबकि हाल ही में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिलने से सारनाथ की वैश्विक पहचान और भी सुदृढ़ हुई है। आइए, इस पावन भूमि के इतिहास, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़े अद्भुत तथ्यों को विस्तार से जानते हैं। सारनाथ का नाम और प्राचीन पहचान सारनाथ केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि करुणा, त्याग और ज्ञान की वह पावन भूमि...