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हनुमान अंश माने जाने वाले नीम करोली बाबा की जीवनगाथा

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  नीम करोली बाबा: जीवन, भक्ति, सेवा और कैंची धाम की कहानी प्रस्तावना — कैंची धाम के संत नीम करोली बाबा उत्तराखंड की शांत और हरी-भरी पहाड़ियों के बीच, शिप्रा नदी के किनारे बसा कैंची धाम आज भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक लोगों के लिए आस्था और आध्यात्मिक शांति का महत्वपूर्ण केंद्र है। वर्ष 1964 में हनुमान मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद इस स्थान की पहचान और भी मजबूत हुई। कैंची धाम का नाम आते ही जिस संत की स्मृति सबसे पहले आती है, वे हैं नीम करोली बाबा, जिन्हें उनके भक्त प्रेम से महाराज जी कहते थे। बाबा का जीवन बाहर से बेहद साधारण दिखाई देता था। साधारण कंबल, सहज मुस्कान और हर व्यक्ति के प्रति प्रेम उनके व्यक्तित्व की पहचान थे। वे हनुमान जी के अनन्य भक्त थे और उनके अनेक भक्त उन्हें हनुमान जी का स्वरूप या अवतार मानते हैं। उनकी शिक्षाओं का केंद्र कठिन साधना या जटिल दर्शन से अधिक प्रेम, सेवा, भक्ति और मानवता था। समय के साथ बाबा की प्रसिद्धि भारत से बाहर भी पहुँची। रिचर्ड अल्पर्ट, जिन्हें बाद में राम दास के नाम से जाना गया, के माध्यम से उनकी शिक्षाओं को पश्चिमी दुनिया में पहचान मिली। बा...