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सह्याद्रि के देव ज्योतिबा: जानिए शिव के इस अनूठे स्वरूप का सच

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महाराष्ट्र के लोकदैवत : भगवान ज्योतिबा और आई अंबाबाई की कहानी  प्रस्तावना — गुलाल से रंगी ज्योतिबा की पहाड़ी महाराष्ट्र के कोल्हापुर से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित रत्नागिरी पहाड़ी भगवान ज्योतिबा की प्रसिद्ध तीर्थस्थली है। लोकमान्यता में इसे वाडी रत्नागिरी या ज्योतिबा की पहाड़ी भी कहा जाता है। पहाड़ी पर स्थित ज्योतिबा मंदिर महाराष्ट्र की लोकआस्था और धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब कोल्हासुर, रक्ताक्ष और रत्नासुर जैसे असुरों के अत्याचार से प्रजा परेशान थी, तब महालक्ष्मी की सहायता के लिए भगवान शिव के तेज से केदारेश्वर, अर्थात ज्योतिबा का प्राकट्य हुआ। रत्नासुर के वध से इस क्षेत्र का संबंध रत्नागिरी नाम से जोड़ा जाता है। ज्योतिबा की भक्ति का सबसे अनोखा रूप चैत्र पूर्णिमा की यात्रा में दिखाई देता है। हजारों श्रद्धालुओं के जयघोष और उड़ते गुलाल से पूरी पहाड़ी गुलाबी रंग में रंग जाती है। विशाल सासन काठियाँ इस यात्रा को और विशेष बनाती हैं। महाराष्ट्र के लोकजीवन में ज्योतिबा केवल एक पूज्य देवता नहीं, बल्कि कुलदैवत, रक्षक और लोकआस्था के प्रतीक के रूप में ...