छत्रपति शिवाजी महाराज: हिंदवी स्वराज्य के महानायक
शिवनेरी से रायगढ़ तक हिंदवी स्वराज्य का स्वर्णिम इतिहास प्रस्तावना — एक बालक से छत्रपति तक सत्रहवीं शताब्दी का दक्कन राजनीतिक संघर्षों से घिरा हुआ था। अहमदनगर की निजामशाही, बीजापुर की आदिलशाही और दक्षिण की ओर बढ़ता मुगल साम्राज्य—इन शक्तियों के संघर्ष का सबसे बड़ा भार किसानों और आम जनता को उठाना पड़ता था। इसी अशांत समय में सह्याद्रि की गोद में स्थित शिवनेरी दुर्ग पर एक बालक का जन्म हुआ—शिवाजी भोसले। माता जीजाबाई के संस्कार और पिता शाहजी राजे की सैन्य-राजनीतिक विरासत के बीच पले इस बालक ने आगे चलकर केवल एक राज्य नहीं बनाया, बल्कि स्वराज्य की ऐसी कल्पना को आकार दिया जिसने इतिहास की दिशा बदल दी। तोरणा से शुरू हुआ किलों का अभियान प्रतापगढ़, पन्हाळा, सिंहगढ़ और रायगढ़ तक पहुँचा। अफजल खान से संघर्ष, पावनखिंड में बाजीप्रभु का बलिदान, तानाजी का सिंहगढ़ अभियान, शाहिस्तेखान पर हमला, आगरा से निकलने की घटना और 1674 का राज्याभिषेक—ये सभी उनकी महान यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव बने। लेकिन शिवाजी महाराज की गाथा केवल उनकी अपनी नहीं थी। जीजाबाई, शाहजी, तानाजी, बाजीप्रभु, मुरारबाजी, प्रतापराव गुजर, हंबीरराव...